जमीन से जुड़े मामलों में फर्जी कागजात पर होगी सख्त कार्रवाई, अंचलाधिकारी दर्ज कराएंगे प्राथमिकी- (Date: 04-01-2026)
राज्य में भूमि से संबंधित मामलों में जाली और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर होने वाले फर्जीवाड़े पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कहा है कि नामांतरण, दाखिल-खारिज अथवा सरकारी भूमि से जुड़े किसी भी मामले में यदि फर्जी कागजात सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई अनिवार्य होगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अंचलाधिकारी स्वयं प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोषियों को संरक्षण देना गंभीर कदाचार माना जाएगा। जमीन माफिया, दलाल और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ डबल इंजन की सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है—कानून का कठोरतम प्रहार किया जाएगा। इस मामले में किसी भी प्रकार की सहनशीलता नहीं बरती जाएगी।
विभाग ने जारी किया सख्त आदेश
उपमुख्यमंत्री की पहल पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव गोपाल सिंह मीणा ने शनिवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। आदेश की प्रति सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं (डीएम), वरीय पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों एवं भूमि सुधार उप-समाहर्ताओं को भेज दी गई है।
सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि पूर्व की समीक्षात्मक बैठकों में यह सामने आया है कि कई स्थानों पर अंचल स्तर से फर्जी दस्तावेजों के मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया है।
भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में होगी कार्रवाई
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। इनमें कूटरचना, कूटरचित दस्तावेज का उपयोग, छल तथा आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
अंचलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश
निर्देश के अनुसार, सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में संबंधित अंचलाधिकारी स्वयं स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। वहीं निजी या रैयती भूमि से जुड़े मामलों में जांच के उपरांत अंचलाधिकारी या राजस्व पदाधिकारी की अनुशंसा पर परिवादी के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
पत्र में यह भी कहा गया है कि जाली दस्तावेज के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जाए। यदि पूर्व में ऐसा कोई आदेश पारित हो चुका है तो उसकी विधि-सम्मत समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फर्जीवाड़े के मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराना या मामले को दबाने का प्रयास कर्तव्य में घोर लापरवाही और गंभीर कदाचार माना जाएगा।