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दाखिल-खारिज लंबित रखना अंचलाधिकारियों को पड़ेगा महंगा : विजय कुमार सिन्हा बिना ठोस कारण म्यूटेशन रोकना अब गंभीर अपराध की श्रेणी में- (Date: 18-01-2026)

पटना।
दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामलों को बिना किसी ठोस कारण के लंबित रखना अब अंचलाधिकारियों के लिए भारी पड़ सकता है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि बेवजह दाखिल-खारिज को लटकाना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आएगा और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि समय पर दाखिल-खारिज नहीं होने से रैयतों का भू-अभिलेख अद्यतन नहीं हो पाता, जिससे वे सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और अन्य वैधानिक सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।

इस संबंध में विभागीय सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि दाखिल-खारिज के आवेदनों का निपटारा बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम के तहत ही किया जाए। आम सूचना जारी होने के बाद 14 दिनों के भीतर यदि कोई वैध आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो अंचलाधिकारी को तत्काल आदेश पारित करना होगा।

पत्र में यह भी कहा गया है कि अंचल स्तर पर बिना आधार स्वतः आपत्ति दर्ज कर मामलों को अनावश्यक रूप से सुनवाई में डालना नियमों के खिलाफ है। केवल सरकारी खाता या खेसरा से जुड़ी भूमि के मामलों में ही स्वतः आपत्ति दर्ज की जा सकती है।

वहीं, बिना वैधानिक हित के आपत्ति दर्ज कराने वाले असामाजिक तत्वों पर भी विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।