पटना। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के शीघ्र निपटारे के लिए समय-सीमा निर्धारित कर दी है। विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) से संबंधित मामलों का निपटारा अधिकतम 35 दिनों के भीतर तथा रिवीजन अपील का निष्पादन 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सभी लंबित वादों का निष्पादन तीन महीने के भीतर सुनिश्चित किया जाए। समाहर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर मामलों की प्रगति की निगरानी करें, ताकि तय समय-सीमा के भीतर अधिकतम मामलों का निपटारा हो सके।
विभाग ने कहा है कि भूमि विवादों के त्वरित समाधान से सामाजिक स्थिरता और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसके लिए लंबित वादों की स्पष्ट परिभाषा तय करते हुए निष्पादन प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया गया है।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि सुनवाई के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाए। किसी भी पक्षकार को बिना सुनवाई का अवसर दिए निर्णय न लिया जाए। संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि न्यायिक प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।
सरकार का मानना है कि निर्धारित समय-सीमा के अनुपालन से आम नागरिकों को राहत मिलेगी और राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।